Khamosh Hai Tab Tak ! “खामोश है तब तक: एक संघर्ष की आवाज़”

“पढ़िए ‘खामोश है तब तक’ !Khamosh Hai tab Tak हिंदी कविता, जो व्यक्त करती है कि चुप्पी का मतलब कमजोरी नहीं होता। यह कविता संघर्ष, आत्मविश्वास और दृढ़ता की शक्ति को उजागर करती है।”

 

“खामोश है तब तक”

“खामोश है वह,
तब तक ठीक है।”

मगर देखो, उसे
ज्यादा न सताना।
ज्यादा मत तड़पाना,
और तरसाना मत उसकी आत्मा को।

भड़कने मत देना, उसके
हृदय को, और हाँ, याद रखना।

“घोर से समझ लेना, उसकी आँखों से
आँसू तो, भूल से भी मत आने देना।”

अरे, वह गरीब है,
लाचार नहीं है।

बेरोज़गार है, मगर
अशिक्षित नहीं है।

पैसा नहीं है उसके पास,
तो क्या हुआ, वह कमजोर नहीं है।

भूखा है तो क्या हुआ,
भिखारी नहीं है वह।

अरे, हिम्मत है, जोश है उसमें,
जवानी है, जूनून है उसमें।

अरे, चिंगारी है वह, उसे हवा मत देना,
आग बनकर जलाएगी, फिर मत कहना।

तभी तो सच है ये कि,
खामोश है वह,
तब तक ठीक है।

 

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